“बदलाव के वादे से लाठीचार्ज तक: कर्मचारियों की आवाज़ सुनने से इंकार कर रही सरकार” — स्वरूप सिंगला
“ सरकार से कर्मचारियों का बकाया डीए तुरंत जारी करने की पुरज़ोर अपील की
बठिंडा, 18 जून
भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार पंजाब में सत्ता में आने से पहले “बदलाव” और जनहितैषी शासन के बड़े-बड़े दावे करती थी। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि सरकारी कर्मचारी अपने जायज़ अधिकारों के लिए अदालतों के दरवाज़े खटखटाने और सड़कों पर संघर्ष करने के लिए मजबूर हैं।
इस संबंध में कर्मचारियों के समर्थन में आवाज़ उठाते हुए भाजपा नेता एवं पूर्व विधायक स्वरूप चंद सिंगला ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कर्मचारी संगठनों को अपने महंगाई भत्ते (डीए) तथा अन्य वैध अधिकारों के लिए न केवल अदालतों में लड़ाई लड़नी पड़ रही है, बल्कि सड़कों पर प्रदर्शन भी करने पड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार की कर्मचारी-विरोधी सोच का ताज़ा उदाहरण पावरकॉम के संघर्षरत लाइनमैनों पर किया गया लाठीचार्ज है, जिसने लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
सिंगला ने कहा कि इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों को उनके मूल कार्यों से हटाकर अनावश्यक सर्वेक्षणों में लगाया जा रहा है। विशेष रूप से महिला कर्मचारियों को नशा सर्वेक्षण के दौरान लोगों से असहज और निजी प्रश्न पूछने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे उन्हें मानसिक दबाव और सामाजिक असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार को कर्मचारियों को विरोधी नहीं, बल्कि प्रशासन की रीढ़ की हड्डी समझना चाहिए। धरनों, लाठीचार्ज और अदालती लड़ाइयों के बजाय संवाद और सहयोग का मार्ग अपनाया जाना चाहिए। कर्मचारियों की जायज़ मांगों का शीघ्र समाधान कर उनमें विश्वास बहाल करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
सिंगला ने कहा कि सरकारें अपनी जनकल्याणकारी नीतियों को लागू करने और लोगों तक लाभ पहुंचाने का कार्य कर्मचारियों के माध्यम से ही करती हैं। यदि उन्हीं कर्मचारियों की जायज़ मांगों को अनसुना किया जाए, तो इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति और कोई नहीं हो सकती।
पूर्व विधायक स्वरूप चंद सिंगला ने पंजाब सरकार से पुरज़ोर अपील करते हुए कहा कि कर्मचारियों का बनता हुआ महंगाई भत्ता (डीए) हर हाल में बिना किसी और देरी के तुरंत जारी किया जाए। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के दौर में कर्मचारियों को उनका वैध हक समय पर मिलना चाहिए और सरकार को इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल निर्णय लेना चाहिए।
सिंगला ने कहा कि कर्मचारियों की जायज़ मांगों को लंबे समय तक लंबित रखना न केवल उनके साथ अन्याय है, बल्कि इससे सरकारी तंत्र का मनोबल भी प्रभावित होता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए उनका बकाया डीए शीघ्र जारी किया जाए, ताकि कर्मचारियों में विश्वास और संतोष का माहौल कायम हो सके।




