*बठिंडा की ऐतिहासिक उपलब्धि: चिकित्सा जगत में भारत का नया अध्याय*
### *भारत की पहली इलेक्ट्रो-होम्योपैथी रिसर्च लैब और फैक्ट्री का बठिंडा में भव्य आगाज़*
बठिंडा
के बठिंडा जिले ने पूरे देश में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया है। देश की पहली अत्याधुनिक *इलेक्ट्रो-होम्योपैथी रिसर्च लैब और मैन्युफैक्चरिंग इकाई* का उद्घाटन आज बठिंडा की धरती पर संपन्न हुआ। यह न केवल पंजाब के लिए, बल्कि पूरे भारत के इलेक्ट्रो-होम्योपैथी चिकित्सकों और रोगियों के लिए एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
*[उद्घाटन समारोह की मुख्य झलकियाँ]*
कार्यक्रम की शुरुआत बेहद गरिमामयी माहौल में हुई। डॉ. हिम्मत सेतिया और चिकित्सा जगत की अन्य प्रमुख हस्तियों ने रिबन काटकर इस अत्याधुनिक लैब का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर देशभर से आए विशेषज्ञों ने इलेक्ट्रो-होम्योपैथी के भविष्य और इसकी प्रभावशीलता पर चर्चा की
*[डॉ. हिम्मत सेतिया: एक प्रेरणादायक उपस्थिति]*
प्रोफेसर हरविंदर सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इस लैब की स्थापना में *डॉ. हिम्मत सेतिया* का विशेष मार्गदर्शन रहा है। गौरतलब है कि डॉ. सेतिया वही शख्सियत हैं जिनके अथक प्रयासों की बदौलत राजस्थान सरकार ने इलेक्ट्रो-होम्योपैथी को आधिकारिक और कानूनी मान्यता प्रदान की है। अब उनकी देखरेख में बठिंडा की यह लैब शोध के नए मानक स्थापित करेगी।
### *मुंबई से आए विशेष अतिथि का संबोधन*
इस समारोह में मुंबई से पधारे ‘इलेक्ट्रो होम्योपैथी फाउंडेशन’ के वाइस प्रेसिडेंट *डॉ. परमिंदर पांडे* ने इस पद्धति की खूबियों पर प्रकाश डाला:
* *पूरी तरह प्राकृतिक:* डॉ. पांडे ने स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रो-होम्योपैथी पूरी तरह से वनस्पति और प्राकृतिक अर्क पर आधारित है।
* *शून्य दुष्प्रभाव (Zero Side-Effects):* इस विधि से तैयार की गई दवाएं मानव शरीर के अंगों पर कोई बुरा असर नहीं डालतीं और जटिल बीमारियों के इलाज में अत्यंत प्रभावी हैं।
### *’आत्मनिर्भर भारत’ की ओर एक मज़बूत कदम*
इस फैक्ट्री और लैब के खुलने का सबसे बड़ा लाभ आर्थिक और सुलभता के रूप में सामने आएगा:
1. *विदेशी निर्भरता का अंत:* अब तक इन विशिष्ट दवाओं के लिए भारतीय डॉक्टरों को विदेशों की ओर देखना पड़ता था।
2. *सस्ती और शुद्ध दवाएं:* बठिंडा में उत्पादन शुरू होने से पूरे भारत के डॉक्टरों और मरीजों को कम कीमत पर उच्च गुणवत्ता वाली शुद्ध दवाएं आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।
### *पंजाब सरकार से बड़ी मांग: “राजस्थान की तर्ज पर मिले मान्यता”*
समारोह के समापन पर मौजूद विशेषज्ञों और इलेक्ट्रो-होम्योपैथी एसोसिएशन के सदस्यों ने पंजाब सरकार के समक्ष अपनी बात रखी। उन्होंने पुरज़ोर मांग की कि:
> “जिस प्रकार राजस्थान सरकार ने इलेक्ट्रो-होम्योपैथी की महत्ता को समझते हुए इसे कानूनी मान्यता दी है, उसी प्रकार *मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार* को भी इस चिकित्सा पद्धति को राज्य में विधिवत मान्यता देनी चाहिए। इससे न केवल वैकल्पिक चिकित्सा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि हज़ारों युवाओं के लिए रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे।”
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*[निष्कर्ष]*
बठिंडा में इस रिसर्च लैब का खुलना स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक ‘गेम-चेंजर’ साबित हो सकता है। अब देखना यह होगा कि पंजाब सरकार इस ऐतिहासिक पहल पर कितनी जल्दी अपनी मुहर लगाती है।
*बठिंडा से विशेष रिपोर्ट।*




